संस्कृत का अर्थ (The meaning of the word Sanskrit)

July 18, 2009 at 11:49 AM | Posted in संस्कृतस्य विषये (About Sanskrit) | Leave a comment
 “संस्कृत” शब्द का अर्थ है संस्कार की गयी अर्थात परिमार्जित(सुधारी हुई भाषा). सम – भली प्रकार,कृत -बने गयी जो भाषा ,वह संस्कृत भाषा.

महर्षि यास्क तथा आचार्य पाणिनी के समय में भी संस्कृत भाषा लोक भाषा थी ,किन्तु उस समय केवल इसके लिए “भाषा शब्द का प्रयोग होता था “संस्कृत” का नहीं.

जब पाली एवं प्राकृत का व्यवहार बढ़ने लगा तथा अधिक प्रयोग होने लगाताब विद्वानों ने पाली और प्राकृत से इसकी विभिन्नता दर्शाने के लिए “संस्कृत” शब्द का प्रयोग आरम्भ किया.

महाकवि डंडी ने अपने “काव्यादर्श” नमक ग्रन्थ में लिखा है की “संस्कृतं नाम दैवी वाक् अन्वाख्यता महर्षिभिः ” अर्थात महर्षियों नें संस्कृत नाम की देव वाणी का अन्वाख्यान किया है.

काव्यग्रंथों में सर्वप्रथम वाल्मीकि रामायण में भाषा के अर्थ में संस्कृत का प्रयोग दिखाई पड़ता है.
 
 

 

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